today rain new – भारतीय मौसम विभाग ने देश के विभिन्न हिस्सों में आने वाले दो दिनों के दौरान मौसम की गंभीर स्थिति को लेकर आगाह किया है। पश्चिमी विक्षोभ की दो सक्रिय प्रणालियों ने उत्तर भारत के मौसम को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। इस मौसमी बदलाव के कारण कई राज्यों में तीव्र वर्षा, तूफानी हवाओं और ओलों की बौछार का सामना करना पड़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति अगले 48 घंटों तक बनी रह सकती है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर जारी है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में लगातार बर्फ गिर रही है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आई है। वहीं मैदानी भागों में बारिश और आंधी-तूफान का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को विशेष रूप से सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।
मध्य प्रदेश में मौसम की मार: जनहानि और फसल विनाश
मध्य प्रदेश में प्रकृति का कहर जारी है। शिवपुरी जिले में आकाशीय बिजली का एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें एक किसान की मौत हो गई। यह घटना तब हुई जब वह अपने खेत में काम कर रहा था और अचानक बिजली गिरने से उसकी जान चली गई। इस त्रासदी ने एक बार फिर मौसम की अप्रत्याशितता और उससे जुड़े खतरों की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
ग्वालियर और मंदसौर जिलों में भयंकर ओलावृष्टि हुई है। खेतों में बर्फ की मोटी परत बिछ गई, जो देखने में तो खूबसूरत लग रही थी, लेकिन किसानों के लिए यह एक बड़ी आपदा साबित हुई। फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है और कई किसान परिवार इस प्राकृतिक आपदा से आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं। आगामी तीन दिनों तक प्रदेश में मौसम की अस्थिरता बनी रहने की संभावना है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
राजस्थान में धुंध का साम्राज्य और बारिश का खतरा
राजस्थान के कई जिलों में घने कोहरे की चादर छाई हुई है। जयपुर और सीकर सहित अनेक इलाकों में दृश्यता इतनी कम हो गई है कि यातायात प्रभावित हो रहा है। सुबह के समय विशेषकर स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है जब कोहरे की सघनता चरम पर होती है। वाहन चालकों को अत्यधिक सावधानी से गाड़ी चलाने की सलाह दी जा रही है।
दक्षिणी राजस्थान के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में वर्षा की प्रबल संभावना है, जो कृषि और दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में राजस्थान का मौसम अत्यंत परिवर्तनशील रहेगा। तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा और किसी भी समय अचानक मौसम बदल सकता है।
बिहार और पंजाब: कोहरे की चुनौती
बिहार में अगले दो दिनों में हल्की बारिश की आशंका जताई गई है। पांच जिलों के लिए कोहरे का येलो अलर्ट लागू है, जिसका मतलब है कि इन क्षेत्रों में दृश्यता गंभीर रूप से प्रभावित होगी। किसानों को खेती-बाड़ी के कामों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। कोहरे के कारण फसलों पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए उचित देखभाल आवश्यक है।
पंजाब की स्थिति और भी गंभीर है। भठिंडा समेत 15 जिलों में घने कोहरे की चेतावनी जारी की गई है। सड़कों पर दुर्घटनाओं का जोखिम काफी बढ़ गया है। राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों पर वाहन चालकों को फॉग लाइट्स का उपयोग करने और धीमी गति से चलने की हिदायत दी गई है। स्कूलों का समय भी कुछ जिलों में बदल दिया गया है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उत्तराखंड में प्रकृति का रौद्र रूप
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में बर्फबारी और बारिश का दौर निरंतर जारी है। उत्तरकाशी और चमोली जैसे जिलों में भारी बर्फ गिर रही है, जिससे तापमान शून्य से भी नीचे चला गया है। ऊंचाई वाले इलाकों में पहुंचना कठिन हो गया है और कई सड़कें बंद हो गई हैं। स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में लगा हुआ है।
कोहरे के कारण एक दर्दनाक हादसा भी हुआ जब एक बस खाई में गिर गई। घटना उस समय हुई जब घने कोहरे के कारण चालक को रास्ता स्पष्ट नहीं दिख रहा था। सौभाग्य से, बड़ी जनहानि टल गई, लेकिन कई यात्री घायल हुए। यह घटना पहाड़ी इलाकों में प्रतिकूल मौसम के दौरान यात्रा के खतरों को रेखांकित करती है।
4-5 फरवरी: विशेष सतर्कता के दिन
मौसम विभाग ने 4 और 5 फरवरी के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, ओडिशा और बिहार में इन दिनों घने कोहरे की प्रबल संभावना है। राजधानी दिल्ली में भी दृश्यता 50 मीटर से भी कम हो सकती है। हवाई और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है, इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा योजनाओं की पुष्टि करते रहने की सलाह दी जाती है।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ भागों में तीव्र वर्षा के साथ-साथ तेज हवाएं चलने का अनुमान है। इन हवाओं की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। कच्चे मकानों और पुराने भवनों को नुकसान पहुंचने का खतरा है। बिजली के तारों और पेड़ों के गिरने की भी आशंका है।
पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष सुझाव
पर्वतीय राज्यों में रहने वाले लोगों को भूस्खलन के प्रति विशेष सजग रहने की आवश्यकता है। भारी बर्फबारी और बारिश से मिट्टी कमजोर हो जाती है और पहाड़ों से चट्टानें गिरने का खतरा बढ़ जाता है। सड़कों पर यात्रा करते समय अत्यधिक सावधानी बरतें और अधिकारियों द्वारा जारी मार्गदर्शन का पालन करें। आवश्यक वस्तुओं का भंडारण करके रखें क्योंकि कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।
बर्फबारी क्षेत्रों में रहने वालों को पर्याप्त गर्म कपड़ों की व्यवस्था करनी चाहिए। हीटिंग सिस्टम की जांच कर लें और आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहें। पशुओं को भी ठंड से बचाने की उचित व्यवस्था करें।
राहत की उम्मीद: 10 फरवरी के बाद
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 10 फरवरी के बाद मैदानी इलाकों में ठंड से कुछ राहत मिलने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता कम होने लगेगी और मौसम धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर अग्रसर होगा। तापमान में क्रमिक वृद्धि होगी और धूप खिलने की संभावना बढ़ेगी।
हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड का प्रभाव अधिक समय तक बना रह सकता है। फिलहाल सभी को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए और सुरक्षा उपायों का पालन करना चाहिए। आपातकालीन नंबरों की जानकारी रखें और किसी भी संकट की स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें। सतर्कता ही सुरक्षा की पहली शर्त है।









